बानू जहाँगीर कोयाजी | |
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जन्म |
7 सितम्बर 1917[1] |
मृत्यु |
15 जुलाई 2004 (उम्र 86 वर्ष) |
आवास | पुणे, महाराष्ट्र, भारत |
नागरिकता | भारतीय |
जातियता | पारसी |
क्षेत्र | चिकित्सा विज्ञान |
संस्थान | किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल, पुणे |
शिक्षा | ग्रन्ट मेडिकल कॉलेज |
प्रसिद्धि | |
उल्लेखनीय सम्मान |
बानू जहाँगीर कोयाजी (22 अगस्त 1918 – 15 जुलाई 2004) भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिक थीं। इन्होंने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। वह किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल, पुणे की निर्देशिका थीं। उन्होंने समुदाय के स्वास्थकर्मियों के माध्यम से महाराष्ट्र के देही इलाक़ों के लिये कई कार्यक्रम प्रारंभ किये थे। वह अपनी कार्यकुशलता की वजह से केन्द्र सरकार की स्वास्थ सलाकार बन गईं थीं और विश्वस्तर पर अपने कार्यक्षेत्र में प्रसिद्ध थीं।[1]
कोयाजी को कई पुरस्कार प्राप्त हुए थे जिनमें १९८९ में पद्मभूषण और सार्वजनिक सेवा के लिये १९९३ में रेमन मैगसेसे पुरस्कार मुख्य रूप से शामिल हैं।[2]
कोयाजी एक सकारात्मक और प्रगतिशील सोच रखती थीं। उनकी इसी सोच के कारण किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल, पुणे, १९४० में मात्र चालीस पलंगों की क्षमता से बढ़कर १९९९ में ५५० पलंगों तक पहुँच गया। वह इस अस्पताल से ५५ साल जुड़ी रहीं और इसके साथ-साथ इन्होंने कई अन्य महत्वपूर्ण पद सम्भालें थे जिनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानव प्रजनन के वैज्ञानिक और तकनीकी समूह की सदस्यता, विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्वास्थ, मानवशक्ति और विकास समूह की सदस्यता, आदि शामिल हैं। इन्होंने महाराष्ट्र सरकार, भारत सरकार और फ़ोर्ड फ़ाउन्डेशन के आलावा कई अन्य संगठनो के लिये सलाहकार के लिए सलाहकार की भूमिका निभाई। इनका महत्वपूर्ण योगदान परिवार नियोजन, बाल स्वास्थ्य और जनसंख्या नियंत्रण रहा जिसमें इन्होंने भारत सरकार को नीतियों के निर्माण और उन्हें क्रियांवित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।[1][3]
कोयाजी चिकित्सा और स्वास्थ के अपने मुख्य कार्यक्षेत्रों के साथ-साथ सकाळ समाचारपत्रों के समूह की निर्देशिका भी थीं।[3]