अन्वीक्षा (inquest) विशेषतः उस न्यायिक जाँच को कहते हैं जो किसी व्यक्ति की मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए की जाती है।[1]
अन्वीक्षा ३ प्रकार की होती है:
भारत में २ ही तरह की अन्वीक्षा होती है
मृत्यु समीक्षक या कोरोनेर्स इन्क़ुएस्त U.K में और कुछ USA के राज्यों मै होती है पर इंडिया मै नहीं होती।
पुलिस थाने के उप निरीक्षक (sub-inspector) इन्क़ुएस्त करता है। यह Cr.P.C, sec 174 मै लिखा है। जब भी पुलिस को जानकारी मिलती है कि मृत्यु हुए है तो जल्दी ही नजदीकी मजिस्ट्रेट को सूचित कर के जाच-पड़ताल के लिए निकल जाता है। पुलिस इन्क़ुएस्त कर सकता है जो मृत्यु हुए है:
उप निरीक्षक जल्दी ही शरीर को देखता है और दो आदरकारी व्यक्ति के आगे रिपोर्ट बनता है और उनके हस्ताक्षर उस रिपोर्ट पर लेता है (sec175, Cr.P.C)। शरीर की जाँच करता है कि कोई चोट है या नहीं या कोई हथियार है या नहीं। जाँच के बाद शरीर रिश्तेदारों को दे दी जाता है।
जिला मजिस्ट्रेट, उप प्रभागीय मजिस्ट्रेट या तहसीलदार कोई भी इन्क़ुएस्त कर सकता है। यह Cr.P.C, sec 20 to 23 मै लिखा है। मगिस्त्ररते इन्क़ुएस्त कर सकता है इन मामलो मै:
मृत्यु समीक्षक या कोरोनेर्स इन्क़ुएस्त U.K में और कुछ USA के राज्यों मै होती है पर इंडिया मै नहीं होती। कॉरोनर इन्क़ुएस्त करता है अस्वाभाविक और संदेहजनक मृत्यु मै।