२५ दिसंबर २०१५ को हिंदू कुश के क्षेत्र में एक 6.3 परिमाण के भूकंप[1][3][4] ने दक्षिण एशिया को प्रभावित किया।[5] पाकिस्तान में एक महिला की मृत्यु हो गई। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में कम से कम 100 लोग घायल हो गए।[6] भूकंप को ज्यादातर ताजिकिस्तान और भारत में महसूस किया गया था। अफगानिस्तान-तजाकिस्तान के सीमा क्षेत्र में भूकंप का केंद्र 203.4 किलोमीटर की गहराई पर होने की सूचना मिली थी।[7]
दक्षिण एशिया के पहाड़, टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से ऊपर ढकेले जाने के कारण, विनाशकारी भूकंप से ग्रस्त हैं। अप्रैल 2015 में एक भूकंप, जो नेपाल के 80 वर्षो में सबसे भीषण भूकंप था, जिसमे 9,000 से अधिक लोग मारे गए।[11]
पिछली बार उसी क्षेत्र में समान परिमाण वाला 7.6 Mw का भूकंप ठीक दस वर्ष पहले अक्टूबर, 2005 में आया था जिसके परिणामस्वरूप 87,351 लोगों की मृत्यु हुई, 75,266 घायल हुए, 2.8 मिलियन (28 लाख) लोग विस्थापित हुए और 250,000 मवेशी मारे गए थे। इस भूकंप और 2005 में आए भूकंप के बीच उल्लेखनीय अंतर भूकंपीय गतिविधि की गहराई का है। इस भूकंप में 212.5 किमी की गहराई थी, जबकि 2005 में आए भूकंप में केवल 15 किमी की ही गहराई थी।[12]
हाल के अध्ययन में, भूवैज्ञानिकों का दावा है कि भूमंडलीय ऊष्मीकरण में वृद्धि, हल ही में हुई भूकंपीय गतिविधि के कारणों में से एक है। इन अध्ययनों के अनुसार ग्लेशियरों के पिघलने और बढते समुद्र के जल स्तर से पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों पर दबाव का संतुलन अस्तव्यस्त है और इस प्रकार भूकंप की तीव्रता आवृत्ति में वृद्धि के कारण हैं। यही कारण है कि हिमालय हाल के वर्षों में भूकंप से ग्रस्त हो रहे हैं।[13][बेहतर स्रोत वांछित]