निशा मिलेट बैंगलोर-कर्नाटक, भारत से एक तैराक है। वह भारत के लिए २००० सिडनी ओलंपिक तैराकी टीम में अर्जुन अवार्ड जीतने वाली एकमात्र महिला थी। निशा को ५ साल की उम्र में डूबने का अनुभव था, जिसके बाद उनके पिता ने उन्हें अपने डर से उबरने के लिए तेराकी सीखने का दबाव दिया। १९९१ में निशा ने अपने पिता के मार्गदर्शन में, ऑबरे शेनयायनगर क्लब, चेन्नई से तैरने का तरीका सीखा। और १९९२ में उन्होंने चेन्नई में ५०मीटर फ्री स्टाइल में अपना पहला राज्य स्तर का पदक जीता था। १९९४ में उन्होंने हांगकांग के एशियाई आयु समूह चैंपियनशिप में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता यह उनके शासनकाल की शुरुआत थी। वह १९९९ में राष्ट्रीय खेलों में १४ स्वर्ण पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय एथलीट थीं। उन्होंने अपने कैरियर की उचाई पर २०० सी फ्री स्टाइल में २००० सिडनी ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था जहां उन्होंने शुरुआत में अच्छा किया परन्तु सेमीफाइनल तक ना पहुंच पाई। निशा ने १०० मीटर फ्री स्टाइल में एक मिनट के बाधा को तोड़ने वाला पहला भारतीय तैराक होने का गौरव भी हासिल किया था। उन्होंने बहुत से सम्मान भी हासिल किए अपने करियर में: