लेपाक्षी Lepakshi లేపాక్షి | |
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![]() वीरभद्र मन्दिर, लेपाक्षी | |
निर्देशांक: 13°48′11″N 77°36′36″E / 13.803°N 77.610°Eनिर्देशांक: 13°48′11″N 77°36′36″E / 13.803°N 77.610°E | |
देश | ![]() |
प्रान्त | आन्ध्र प्रदेश |
ज़िला | श्री सत्य साई ज़िला |
जनसंख्या (2011)[1] | |
• कुल | 10,042 |
भाषाएँ | |
• प्रचलित | तेलुगू |
समय मण्डल | भामस (यूटीसी+5:30) |
पिनकोड | 515331 |
वाहन पंजीकरण | AP-02 |
वीरभद्र मंदिर आंध्र-प्रदेश(भारत) राज्य के लेपाक्षी ग्राम में स्थित एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव के रुद्र अवतार वीरभद्र को समर्पित है। 16 वीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर का स्थापत्य वैशिष्ट्य विजयनगर शैली में बनाया गया है। इस मंदिर की लगभग हर खुली सतह पर नक्काशी और चित्रों की प्रचुरता है। यह राष्ट्रीय महत्व के केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारकों में से एक है। इसे सबसे शानदार विजयनगर मंदिरों में से एक माना जाता है।[2][3] भित्ति-चित्र में राम और कृष्ण के चित्रों को चमकीले कपड़ों तथा रँगों में दर्शाया गया है। मंदिर में एक बहुत बड़ा नंदी (बैल), शिव-पर्वत है, जो मंदिर से लगभग 200 मीटर दूर है। यह मंदिर कई कन्नड़ शिलालेखों का गृह है क्योंकि यह कर्नाटक सीमा के समीप स्थित है।
मंदिर को लेपाक्षी शहर के दक्षिणी किनारे पर, ग्रेनाइट चट्टान की कम ऊँचाई वाली पहाड़ी पर बनाया गया है। वह एक कछुए के आकार का है इसलिए इसे 'कूर्मा सैला' के नाम से जाना जाता है। यह बंगलुरु से 140 कि.मी. दूर है।
मंदिर का निर्माण 1530 ईस्वी में वीरुपन्ना नायक और वीरन्ना द्वारा किया गया था। वे दोनों भाई पेनुकोंडा में राजा अच्युतराय के शासनकाल के दौरान विजयनगर साम्राज्य के अधीन राज्यपाल थे। इस मंदिर में केवल कन्नड़ शिलालेख हैं। स्कंद पुराण के अनुसार यह मंदिर दिव्यक्षेत्रों में से एक है। यह भगवान शिव का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।