'सरिय्या हज़रत अबू हदरद सलमी रज़ि० | |||||||
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मुहम्मद की सैन्य उपलब्धियाँ का भाग | |||||||
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सरिय्या हज़रत अबू हदरद सलमी रज़ि० या सरिय्या गाबा सैन्य अभियान मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदेश पर जनवरी 629 ईस्वी, और इस्लामी कैलेंडर के शव्वाल (दसवें महीने) 7 हिजरी में हुआ।
इस्लाम के विद्वान सफिउर्रहमान मुबारकपुरी लिखते हैं कि इसे इमाम इब्ने कय्यिम ने उमरा-ए-क़ज़ा से पहले 07 हि० की झड़पों में गिना है। इस का सार यह है कि क़बीला जश्म बिन मुआविया का एक आदमी बहुत से लोगों को साथ ले कर गाबा आया। वह चाहता था कि बनू कैस को मुसलमानों से लड़ने के लिए जमा करे। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हज़रत अबू हदरद को सिर्फ दो आदमियों के साथ रवाना किया। हज़रत अबू हदरद रज़ि० ने कोई ऐसी लड़ाई की रणनीति अपनायी कि दुश्मन को ज़बरदस्त हार हुई और वे बहुत ऊंट और भेड़-बकरियां हांक लाए। [1] [2]
इस्लामी शब्दावली में अरबी शब्द ग़ज़वा [3] इस्लाम के पैग़ंबर के उन अभियानों को कहते हैं जिन मुहिम या लड़ाईयों में उन्होंने शरीक होकर नेतृत्व किया,इसका बहुवचन है गज़वात, जिन मुहिम में किसी सहाबा को ज़िम्मेदार बनाकर भेजा और स्वयं नेतृत्व करते रहे उन अभियानों को सरियाह(सरिय्या) या सिरया कहते हैं, इसका बहुवचन सराया है।[4] [5]